मैं लिपटता हूं तेरे ग़म से तो जी लेता हूं

Anmol Sinha

मैं लिपटता हूं तेरे ग़म से तो जी लेता हूं

शाम होते ही तेरी याद में पी लेता हूं

 

अपने रस्ते के सारे कांटे मैं खुद चुनकर

अपने दिल के ज़ख्मों को भी यहां सी लेता हूं

 

इससे ज़्यादा भी तेरी आरज़ू करूं कैसे

बंदगी में अब तेरे नाम को भी लेता हूं

 

चाहे हो खुशी या हों ग़म की वो यहाँ बातें

मुस्कुराके अब हर एक दौर को जी लेता हूं

 

शाम होते ही तेरी यादों में खो जाता हूं

जाम हाथ में हो या ज़हर हो पी लेता हूं।

 

अनमोल

  • Author: Anmol (Pseudonym) (Offline Offline)
  • Published: May 30th, 2026 23:35
  • Category: Love
  • Views: 0


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