हम जबसे दोस्त तेरे सहारे नहीं रहे
तब से नसीब के भी यूं मारे नहीं रहे
इन आंखों ने भर दिये उल्फत के कर्ज़ सब
अब ख़्वाब इनमें कोई तुम्हारे नहीं रहे
अब क्या तलाश कर रहा है दिल नहीं पता
अब इस दयार में वो नज़ारे नहीं रहे
आंखें ये देखकर तुझे पहले चमकती थीं
अब इनमें पहले से वो सितारे नहीं रहे
क्या अब तुम्हारी आंख का जादू उतर गया
अब इनमें पहले से वो इशारे नहीं रहे।
अनमोल
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Author:
Anmol (Pseudonym) (
Offline) - Published: June 22nd, 2026 20:30
- Category: Love
- Views: 1

Offline)
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