तु सामने था पर न कहीं तु मिला मुझे
खोजी तुझे नज़र न कहीं तु मिला मुझे
ता उम्र जैसे मुझको भी तेरी तलाश थी
फिर शाम और सहर न कहीं तु मिला मुझे
सोचा कि देख लूं तुझे मैं तेरे घर ही में
देखा जो तेरे घर न कहीं तु मिला मुझे
कुछ ऐसे तु यहां जुदा मुझसे हुआ कि फिर
आई तेरी ख़बर न कहीं तु मिला मुझे
चलते हुए मैं संग जो तेरे रुका यहां
फिर मेरे हमसफ़र न कहीं तु मिला मुझे।
अनमोल
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Author:
Anmol (Pseudonym) (
Offline) - Published: August 12th, 2026 12:05
- Category: Unclassified
- Views: 0

Offline)
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