तु सामने था पर न कहीं तु मिला मुझे

Anmol Sinha

तु सामने था पर न कहीं तु मिला मुझे

खोजी तुझे नज़र न कहीं तु मिला मुझे

 

ता उम्र जैसे मुझको भी तेरी तलाश थी

फिर शाम और सहर न कहीं तु मिला मुझे

 

सोचा कि देख लूं तुझे मैं तेरे घर ही में

देखा जो तेरे घर न कहीं तु मिला मुझे

 

कुछ ऐसे तु यहां जुदा मुझसे हुआ कि फिर

आई तेरी ख़बर न कहीं तु मिला मुझे

 

चलते हुए मैं संग जो तेरे रुका यहां

फिर मेरे हमसफ़र न कहीं तु मिला मुझे।

 

अनमोल

  • Author: Anmol (Pseudonym) (Offline Offline)
  • Published: August 12th, 2026 12:05
  • Category: Unclassified
  • Views: 0


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